नटखट चोर
आ जाए वो चोर घर, राह तकी जाती थी। नन्हे हाथ पहुंच सके जहां, मटकी वही रखी जाती थी।। हल्की सी कुंडी दरवाजे पे तो बस एक दिखावा था। आंगन में पड़े श्याम पग, हर हृदय का बुलावा था।। फोड़कर वो मटकी, माखन जूठी कर जाए। हो आज मेरे माखन की बारी, भाग्य आज मेरे धन्य कर जाए। । झूठ मूठ कान मरोड़, हसीं दाब खिसियाना।। शिकायत करु क्या मैया से, कह कर उसे चिढाना।। छलती थी रोज अहीरने, रोज जाल बिछाती थी।। फंसता था वो नटखट चोर, खूब उसे नचाती थी।। उनकी उंगलीयो पर नाचते मधुसूदन, कितना बड़ा दिखावा था। माखन चोर ने हृदय चुराए, छलिये का छलावा था।।। __अरूणिमा 4_9_2026