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नटखट चोर

 आ जाए वो चोर घर,  राह तकी जाती थी। नन्हे हाथ पहुंच सके जहां, मटकी वही रखी जाती थी।। हल्की सी कुंडी दरवाजे पे तो बस एक दिखावा था। आंगन में पड़े श्याम पग, हर हृदय का बुलावा था।। फोड़कर वो मटकी, माखन जूठी कर जाए।  हो आज मेरे माखन की बारी, भाग्य आज मेरे धन्य कर जाए। । झूठ मूठ कान मरोड़, हसीं दाब खिसियाना।। शिकायत करु क्या मैया से, कह कर उसे चिढाना।। छलती थी रोज अहीरने, रोज जाल बिछाती थी।। फंसता था वो नटखट चोर, खूब उसे नचाती थी।। उनकी उंगलीयो पर नाचते मधुसूदन, कितना बड़ा दिखावा था। माखन चोर ने हृदय चुराए, छलिये का छलावा था।।। __अरूणिमा 4_9_2026

माॅ है तो

मां है तो यकीन है कि जो बिगड़ा है,  वो सुधर जायेगा। बिखरा हुआ  समेट कर संवर जायेगा ।। भरा दिल उडेल दू जहा,  मां वो सुकून है। खाली उदास दिल को भर दे जो, मा वो जुनून है।। मेरे शंका - ग्लानि  के व्यूह को भेदने वाली , अचूक शस्त्र मां।। " तुम कर लोगी"....मेरी साहस का उर्जा मंत्र मां।। मां है तो बचा हुआ, बचपन का जायका है। जीवन के हर किस्से कहानी की,  वह प्रमुख नायिका है।। भागमभाग , आनन फानन, दुविधा, शंका ... जाने कितनी समस्याओ मे मन ग्रसित है। पर है अटूट भरोसा कि मां की दुआ मे सब सुरक्षित है।।। मां है तो....